
आपको बता दें कि फरीदाबाद मॉड्यूल में सबसे पहले डॉ आदिल को सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों की कड़ी पूछताछ में आदिल ने डॉ. मुज़म्मिल शकील के नाम का खुलासा किया तो NIA और ATS ने एक के बाद एक कई कार्रवाइयाँ की हैं। जिसके बाद कई सवाल भी लोगों के जहन में आए हैं। जैसे कि डॉ. आदिल जैश-ए-मोहम्मद से कैसे जुड़ा? आतंकवादी मुज़म्मिल, डॉ. शाहीन और डॉ. उमर से कैसे मिला? उनका क्या संबंध है? वे एक-दूसरे को कैसे जानते हैं? अमोनियम नाइट्रेट का भंडार डॉ. मुज़म्मिल तक कबऔर कैसे पहुँचा?
दरअसल डॉ. आदिल मूल रूप से कश्मीर के कुलगाम ज़िले के गांव वानपुरा के रहने वाले हैं। उन्होंने श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने अनंतनाग स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में काम किया। हालाँकि 2024 में उन्होंने अनंतनाग सरकारी अस्पताल से इस्तीफा दे दिया और सहारनपुर चले आए। जहां डॉ आदिल ने पहले VBROS हॉस्पिटल और उसके बाद मार्च 2025 से सहारनपुर के अम्बाला रोड़ स्थित फेमस अस्पताल में मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
मंगलवार को रात अफवाह उड़ी कि डॉ बाबर को भी एटीएस ने गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन डॉ बाबर लगातार फेमस अस्पताल में अपनी ड्यूटी दे रहे है। डॉ बाबर ने बताया कि डॉ आदिल से उनकी पहचान इस अस्पताल में आने पर ही हुई थी। डॉ आदिल सुबह से शाम 7 बजे तक अस्पताल में काम करते थे। 4 अक्टूबर को आदिल की जम्मू-कश्मीर में शादी थी वे भी उसकी शादी में शामिल हुए थे। लेकिन शादी में भी कोई ऐसी चीज उन्हेबनजर नहीं आई जो संदिग्ध हो। डॉ आदिल ने डॉ. बाबर और डॉ. असलम जैदी समेत चार मुस्लिम डॉक्टरों को शादी के कार्ड दिए। लेकिन अस्पताल के निदेशक डॉ. मनोज मिश्रा को आमंत्रित नहीं किया।
फेमस अस्पताल के प्रशानिक अधिकारी डॉ असलम जैदी ने बताया कि शादी के 27 दिन बाद डॉ आदिल 1 नवंबर को अपनी ड्यूटी पर लौट आए। वह अपने हनीमून पर जाने की तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें 6 नवंबर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, डॉ. आदिल के भाई भी डॉक्टर हैं और उनकी पत्नी रुकैया एक सर्जन बताई जा रही हैं। जांच एजेंसियों की जांच में पता चला कि डॉ. आदिल की मुलाकात श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के दौरान शोपियां निवासी मौलवी इरफान अहमद से हुई। इरफान श्रीनगर के बाहरी इलाके छानपुरा स्थित मस्जिद अली नकीबाग के इमाम हैं। वह कश्मीर में आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का एक सक्रिय सदस्य है और लोगों को संगठन से जोड़ने का काम करता है।
डॉ आदिल ने ATS को बताया कि 17 अक्टूबर को मौलवी इरफ़ान ने नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े पोस्टर लगाए। पोस्टर लगाने वालों में नौगाम निवासी आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार शामिल थे। ये सभी सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गए। 19 अक्टूबर को श्रीनगर पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।जम्मू-कश्मीर पुलिस ने श्रीनगर के एसएसपी संदीप चक्रवर्ती के नेतृत्व में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि पोस्टर मौलवी इरफ़ान और डॉ. अदील के कहने पर लगाए गए थे। पुलिस ने मौलवी इरफ़ान को गिरफ्तार कर लिया। उसकी सूचना के आधार पर जमीर अहमद अहंगर को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद पुलिस ने डॉ. आदिल की तलाश शुरू कर दी।
जब पुलिस जमीर के साथ डॉ. आदिल के घर पहुँची तो उन्हें पता चला कि वह 1 नवंबर को सहारनपुर चले गए। 6 नवंबर को उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) की मदद से जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. अदील को सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया। डॉ बाबर ने बताया कि उन्हें आदिल पर जरा भी शक नहीं था। लेकिन उसने धरती के भगवान कहे जाने पेशे को बदनुमा दाग से लगाए हैं। जो माफी के लायक नहीं है। ऐसी देश द्रोही को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। पढ़े लिखे अच्छी डिग्री वाले लोग आतंकी संगठनों से तालुक रखेंगे उन्हें कभी सोचा भी नहीं था। जब पुलिस आदिल को गिरफ्तार करने आई थी तब से अस्पताल में डर और दहशत का माहौल बना हुआ है। पूरा स्टाफ सदमे में है। हालांकि एटीएम ने अस्पताल के सभी डॉक्टरों और स्टाफ से भी पूछताछ की है। वे जांच एजेंसियों का जांच में पूर्ण सहयोग करेंगे।

